ईरान के खिलाफ अमेरिका के सैन्य अभियान को करीब छह महीने हो चुके हैं और अब इसकी आर्थिक और सैन्य कीमत का विस्तृत आकलन सामने आया है। अमेरिकी Congressional Budget Office (CBO) की रिपोर्ट के मुताबिक, 28 फरवरी से 1 अगस्त 2026 तक अमेरिकी युद्ध की लागत करीब 38 अरब डॉलर रही। संघर्ष जारी रहने पर खर्च हर महीने लगभग 2 से 3 अरब डॉलर बढ़ सकता है।


38 अरब डॉलर कहां खर्च हुए?

CBO के अनुसार युद्ध की लागत का बड़ा हिस्सा हथियारों और मिसाइलों की खपत तथा उन्हें दोबारा खरीदने पर जा रहा है। अमेरिकी रक्षा विभाग के Inspector General की रिपोर्ट के मुताबिक, 29 जून तक Operation Epic Fury की अनुमानित लागत 33.4 अरब डॉलर थी।

इसमें करीब:

  1. 22.3 अरब डॉलर — इस्तेमाल किए गए हथियार और गोला-बारूद
  2. 3.7 अरब डॉलर — सैन्य उपकरणों का नुकसान
  3. 7.4 अरब डॉलर — सामान्य CENTCOM खर्चों से अतिरिक्त ऑपरेशनल लागत

शामिल थी।


अमेरिकी हथियारों का भंडार हुआ कमजोर

इस युद्ध का एक बड़ा असर अमेरिकी हथियारों के रणनीतिक भंडार पर पड़ा है। CBO के मुताबिक, जून 2025 से अब तक कुछ महत्वपूर्ण missile-defense interceptors के अमेरिकी स्टॉक का लगभग आधा से दो-तिहाई हिस्सा इस्तेमाल हो चुका है। इन भंडारों को दोबारा भरने में उत्पादन क्षमता बढ़ाने के बावजूद कम से कम पांच साल लग सकते हैं।

Pentagon Inspector General ने भी कहा कि युद्ध में भारी मात्रा में गोला-बारूद इस्तेमाल होने के कारण अमेरिकी सेना को कुछ महत्वपूर्ण हथियारों में “strategic inventory shortfalls” का सामना करना पड़ा है।


अमेरिकी सैन्य विमानों और ठिकानों को भी नुकसान

रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी हमलों में मध्य पूर्व के कई देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर सैकड़ों इमारतें और संरचनाएं क्षतिग्रस्त या नष्ट हुईं। इनमें कुवैत, बहरीन, कतर, UAE, सऊदी अरब, इराक, ओमान और जॉर्डन के ठिकाने शामिल हैं।

वहीं, अमेरिकी विमानों को भी नुकसान हुआ। रिपोर्ट में चार F-15E, एक A-10, कई हेलिकॉप्टर और एक MQ-4C ड्रोन के नुकसान के साथ 30 तक MQ-9 Reaper ड्रोन के नष्ट या क्षतिग्रस्त होने की जानकारी दी गई है।


अमेरिकी सैनिकों की भी गई जान

अमेरिकी सरकार के आंकड़ों के अनुसार 18 अमेरिकी सैन्यकर्मी मारे गए हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में सैनिक घायल हुए हैं।

यह आंकड़ा युद्ध की प्रत्यक्ष मानवीय कीमत को दर्शाता है। हालांकि, CBO का 38 अरब डॉलर वाला अनुमान भविष्य के इलाज, दीर्घकालिक स्वास्थ्य देखभाल और कुछ अन्य संभावित खर्चों को पूरी तरह शामिल नहीं करता।


अमेरिकी डिप्लोमैटिक इमारतों को भी नुकसान

युद्ध का असर अमेरिकी सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहा। अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, मध्य पूर्व के चार देशों में अमेरिकी राजनयिक परिसरों को नुकसान पहुंचा, जिसकी अनुमानित लागत करीब 18.4 करोड़ डॉलर है।

इसके अलावा अमेरिकी नागरिकों और अन्य लोगों को निकालने तथा आपातकालीन प्रतिक्रिया पर करीब 11.3 करोड़ डॉलर खर्च होने की जानकारी दी गई है। लगभग 9,000 अमेरिकी नागरिकों को प्रभावित क्षेत्रों से निकालने की प्रक्रिया भी चलानी पड़ी।


हर महीने बढ़ सकता है 2-3 अरब डॉलर का खर्च

CBO का अनुमान है कि यदि युद्ध जारी रहता है तो अमेरिका को हर महीने करीब 2 से 3 अरब डॉलर अतिरिक्त खर्च करने पड़ सकते हैं। संघर्ष की तीव्रता बढ़ने पर यह रकम और अधिक हो सकती है।

इसके अलावा ईरान के साथ संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल आपूर्ति बाधित होने से ऊर्जा कीमतों पर भी असर पड़ा है। CBO ने अनुमान लगाया है कि युद्ध से अमेरिकी महंगाई में भी लगभग 0.5 प्रतिशत अंक का इजाफा हो सकता है।


कुल कीमत अभी और बढ़ सकती है

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 38 अरब डॉलर अंतिम कीमत नहीं है। यह अनुमान 1 अगस्त तक के प्रत्यक्ष खर्च पर आधारित है। इसके बाद हुए सैन्य अभियानों, भविष्य के हथियारों की खरीद, सैन्य ठिकानों की मरम्मत और लंबे समय की सैन्य तैनाती की लागत अलग से जुड़ सकती है।

यानी ईरान के खिलाफ अमेरिकी अभियान की कीमत सिर्फ डॉलर में नहीं चुकानी पड़ रही है—अमेरिकी हथियार भंडार, सैन्य उपकरण, ठिकानों और सैनिकों पर भी इसका असर पड़ा है।