भारत के लिए रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदना एक बार फिर अमेरिकी दबाव के केंद्र में आ गया है। अमेरिका की प्रतिनिधि सभा में ‘Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026’ से जुड़ा विधेयक आगे बढ़ चुका है। इसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार देने का प्रावधान है। भारत भी संभावित रूप से प्रभावित होने वाले देशों में शामिल है।
भारत पर 100% टैरिफ की तलवार?
हाउस में पेश एक संशोधन में भारत और चीन समेत 10 देशों को सीधे सूची में शामिल करने का प्रस्ताव आया है। इसमें तुर्किये, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाकिया, UAE, सिंगापुर, कजाखस्तान और किर्गिज गणराज्य भी शामिल हैं।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि भारत पर अभी 100% टैरिफ लग गया है। बिल के पारित होने और राष्ट्रपति द्वारा इस अधिकार का इस्तेमाल किए जाने के बाद ही ऐसा कोई शुल्क लागू हो सकता है।
सीनेट से पहले ही पास हो चुका है बिल
इस विधेयक को अमेरिकी सीनेट ने 7 अगस्त को 86-11 वोट से मंजूरी दी थी। अब प्रतिनिधि सभा में इसकी प्रक्रिया चल रही है। हाउस में इसे आगे बढ़ाने वाला प्रक्रियागत वोट 214-211 से पास हुआ है और अब अंतिम वोटिंग की प्रक्रिया बाकी है।
भारत में तेल क्यों महंगा हो सकता है?
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है और रूस भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है। अगर अमेरिका भारत पर अतिरिक्त 100% टैरिफ लगाता है, तो इसका सीधा असर मुख्य रूप से भारत-अमेरिका व्यापार पर पड़ेगा। इससे भारतीय उत्पादों की अमेरिकी बाजार में लागत बढ़ सकती है।
तेल की कीमत पर असर हालांकि सीधे और निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता। यदि इस अमेरिकी कदम के कारण रूस से तेल खरीदना भारत के लिए महंगा पड़ता है या आपूर्ति व्यवस्था बदलती है, तो भारतीय रिफाइनरों की लागत और अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार की स्थिति के आधार पर घरेलू ईंधन कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
पहले से ही कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हुई हैं
अमेरिका-ईरान संघर्ष और मध्य पूर्व में ऊर्जा ढांचे पर हमलों के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पहले से दबाव में है। Reuters के मुताबिक, सितंबर में भारत का crude basket करीब $109.76 प्रति बैरल तक पहुंच चुका था, जबकि अगस्त में इसका औसत $90.19 था।
Brent crude भी हाल में $100 प्रति बैरल के ऊपर जा चुका है। ऐसे माहौल में रूस से तेल खरीद पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव भारत के लिए चुनौती बढ़ा सकता है।
ट्रंप प्रशासन का तर्क क्या है?
अमेरिकी कानून निर्माताओं का तर्क है कि रूस से होने वाली ऊर्जा आय रूस को यूक्रेन युद्ध के लिए आर्थिक संसाधन उपलब्ध कराती है। इसलिए रूस के ऊर्जा कारोबार और उसके प्रमुख खरीदारों पर दबाव बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। प्रस्ताव में रूस की ऊर्जा व्यवस्था और प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले कथित ‘Shadow Fleet’ पर भी कार्रवाई की बात है।
अंतिम फैसला अभी बाकी
इस समय सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत पर 100% टैरिफ लागू नहीं हुआ है। हाउस में अंतिम मतदान और उसके बाद की विधायी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही तस्वीर साफ होगी। इसके अलावा, राष्ट्रपति के पास उपलब्ध शक्तियों और संभावित छूट के प्रावधान भी अंतिम प्रभाव को प्रभावित कर सकते हैं।
यानी फिलहाल यह ‘तेल पर 100% टैक्स’ नहीं है, बल्कि ऐसा प्रस्तावित अमेरिकी कानून है जो ट्रंप को भारत जैसे रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने की शक्ति दे सकता है। इसका आगे का असर हाउस की अंतिम वोटिंग और ट्रंप प्रशासन के फैसले पर निर्भर करेगा।