पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के अंदर चल रहे संगठनात्मक विवाद ने अब चुनावी पहचान का रूप ले लिया है। चुनाव आयोग ने ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ के नाम और उसके आरक्षित ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न को अंतरिम तौर पर फ्रीज कर दिया है। इसका मतलब है कि फिलहाल पार्टी के दोनों प्रतिद्वंद्वी गुट आगामी विधानसभा उपचुनाव में TMC के मौजूदा नाम और सिंबल का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे।

दोनों गुटों से मांगे गए तीन-तीन नाम और सिंबल

चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी और दूसरे गुट से कहा है कि वे 18 सितंबर सुबह 11 बजे तक अपने समूह के लिए तीन-तीन नाम और तीन-तीन फ्री चुनाव चिह्न प्राथमिकता के क्रम में सुझाएं।

आयोग इन विकल्पों में से प्रत्येक गुट के लिए एक नाम और एक चुनाव चिह्न आवंटित करेगा। दोनों गुट चाहें तो अपने नए नाम में मूल ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ से संबंध का उल्लेख भी कर सकते हैं।

6 अक्टूबर को होने हैं दो विधानसभा उपचुनाव

यह अंतरिम फैसला नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव से पहले आया है। दोनों सीटों पर TMC से जुड़े दोनों गुटों ने अपने-अपने उम्मीदवार उतारे हैं।

चुनाव आयोग के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि दोनों पक्ष पार्टी के नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न पर अपना दावा कर रहे थे, जबकि उपचुनाव की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है।

EC ने क्यों लिया अंतरिम फैसला?

आयोग ने कहा कि पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अंतिम फैसला करने के लिए Election Symbols (Reservation and Allotment) Order, 1968 के पैराग्राफ 15 के तहत विस्तृत प्रक्रिया की जरूरत है।

लेकिन उपचुनाव के लिए समय कम होने के कारण तत्काल अंतरिम व्यवस्था जरूरी थी। इसलिए अंतिम फैसला आने तक दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और फ्री सिंबल देने का फैसला किया गया है।

क्या यह TMC पर अंतिम फैसला है?

नहीं। चुनाव आयोग का मौजूदा आदेश अंतरिम है। इससे यह तय नहीं हुआ है कि TMC का मूल नाम और ‘फूल-घास’ सिंबल स्थायी रूप से किस गुट को मिलेगा।

आयोग ने स्पष्ट किया है कि दोनों पक्षों के दावों पर आगे सार्थक और अंतिम निर्धारण किया जाना बाकी है।

ममता गुट ने आदेश पर जताई आपत्ति

ममता बनर्जी की ओर से चुनाव आयोग की सुनवाई में शामिल TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने अंतरिम आदेश को “अस्वीकार्य” बताया। वहीं ऋतब्रत बनर्जी के गुट ने भी आयोग के सामने अपने दस्तावेज और दावे पेश किए हैं।

दोनों पक्ष पार्टी के नाम, संगठन और चुनाव चिह्न पर अपना अधिकार जता रहे हैं।

पहले भी हो चुका है ऐसा

चुनाव आयोग पहले भी पार्टी में विभाजन की स्थिति में नाम और चुनाव चिह्न फ्रीज कर चुका है। 2022 में शिवसेना के उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे गुटों के विवाद के दौरान ‘धनुष-बाण’ सिंबल को फ्रीज किया गया था। इसी तरह 2021 में लोक जनशक्ति पार्टी के विवाद में ‘बंगला’ चुनाव चिह्न पर रोक लगाई गई थी।

अब आगे क्या होगा?

फिलहाल दोनों गुटों को अपने नए नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प देने हैं। इसके बाद चुनाव आयोग आगामी उपचुनावों के लिए प्रत्येक गुट को अलग नाम और सिंबल आवंटित करेगा।

वहीं TMC के मूल नाम और ‘फूल-घास’ चुनाव चिह्न पर अंतिम अधिकार किसे मिलेगा, इसका फैसला आयोग की आगे की प्रक्रिया के बाद होगा। यह अंतरिम आदेश उस अंतिम विवाद का निपटारा नहीं करता।