पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर जारी विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। चुनाव आयोग ने दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को मौजूदा TMC नाम और ‘फूल एवं घास’ चुनाव चिह्न इस्तेमाल करने से रोक दिया है। इसके बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने आगामी उपचुनावों के लिए अपने पसंदीदा नए नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प आयोग को सौंप दिए हैं।
ममता गुट ने तीन नाम और चिह्न सुझाए
रिपोर्ट्स के मुताबिक ममता बनर्जी गुट ने तीन नए पार्टी नामों के विकल्प चुनाव आयोग को भेजे हैं। इन नामों में मूल TMC पहचान और ममता बनर्जी के नाम को बनाए रखने की कोशिश की गई है।
चुनाव चिह्न के लिए गुट ने स्पोर्ट्स थीम को प्राथमिकता दी है। रिपोर्टों में फुटबॉल प्लेयर और क्रिकेट बैट जैसे विकल्पों का उल्लेख है। हालांकि अंतिम रूप से कौन-सा सिंबल आवंटित होगा, इसका फैसला चुनाव आयोग करेगा।
‘खेला होबे’ से जुड़ सकता है खेल वाला सिंबल
ममता बनर्जी की राजनीति में ‘खेला होबे’ नारा काफी चर्चित रहा है। ऐसे में फुटबॉल या क्रिकेट से जुड़े चुनाव चिह्न को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
हालांकि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि चुनाव आयोग ममता गुट को इन्हीं में से कोई प्रतीक आवंटित करेगा। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक आयोग की फ्री सिंबल सूची से ही विकल्प चुना जाना है।
EC ने क्यों फ्रीज किया TMC का नाम और जोड़ाफूल?
चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को अंतरिम आदेश जारी करते हुए कहा कि उसके सामने TMC के दो प्रतिद्वंद्वी गुट हैं और दोनों पार्टी पर अपना दावा कर रहे हैं।
आयोग ने अंतिम फैसला होने तक दोनों गुटों को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फूल एवं घास’ चुनाव चिह्न इस्तेमाल करने से रोक दिया। दोनों पक्षों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न देने की अंतरिम व्यवस्था की गई है।
18 सितंबर सुबह 11 बजे तक देना था विकल्प
EC ने दोनों गुटों को निर्देश दिया था कि वे 18 सितंबर सुबह 11 बजे तक अपने पसंदीदा तीन नाम और तीन-तीन फ्री चुनाव चिह्न प्राथमिकता के क्रम में बताएं। आयोग इसके बाद प्रत्येक गुट के लिए एक नाम और एक चुनाव चिह्न आवंटित करेगा।
ममता गुट ने गुरुवार रात करीब 11:36 बजे अपना जवाब आयोग को भेज दिया। रिपोर्टों के मुताबिक यह जवाब ‘कड़े विरोध’ के साथ भेजा गया।
6 अक्टूबर को होने हैं उपचुनाव
यह पूरी कवायद पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव को देखते हुए की गई है। EC ने कहा है कि यह अंतरिम व्यवस्था इन उपचुनावों के लिए लागू रहेगी और TMC के नाम-सिंबल विवाद पर अंतिम निर्णय होने तक जारी रह सकती है।
क्या हमेशा के लिए छिन गया ‘फूल-घास’?
नहीं। अभी चुनाव आयोग ने अंतरिम तौर पर इस नाम और चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगाई है। यह अंतिम फैसला नहीं है कि मूल TMC नाम और ‘फूल एवं घास’ सिंबल भविष्य में किस गुट को मिलेगा।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि पार्टी के संगठनात्मक नियंत्रण और नाम-सिंबल के दावे पर अंतिम निर्धारण अलग प्रक्रिया के तहत किया जाएगा।
अब नजर EC के फैसले पर
फिलहाल ममता गुट और ऋतब्रत बनर्जी गुट दोनों को आगामी उपचुनावों में अलग पहचान के साथ मैदान में उतरना पड़ सकता है। फुटबॉल, क्रिकेट बैट या कोई अन्य सिंबल—अंतिम चुनाव चिह्न कौन-सा होगा, इसका फैसला EC के आवंटन के बाद ही स्पष्ट होगा।
इस पूरे घटनाक्रम का अंतिम असर TMC के नाम और चुनाव चिह्न पर चल रही मूल संगठनात्मक लड़ाई के अंतिम फैसले के बाद ही स्पष्ट होगा।