बेटी के बयान से शुरू हुआ विवाद

विवाद उस समय बढ़ा जब कोंडा सुरेखा की बेटी कोंडा सुष्मिता पटेल ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और कांग्रेस नेतृत्व पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए। उन्होंने मुख्यमंत्री पर गंभीर आरोप भी लगाए और आगामी विधानसभा चुनाव में परकाल सीट को लेकर अपनी राजनीतिक दावेदारी जताई।

इसके बाद कांग्रेस के कई विधायकों और नेताओं ने कोंडा सुरेखा के खिलाफ कार्रवाई की मांग शुरू कर दी। करीब 20 कांग्रेस नेताओं ने उनकी कैबिनेट से बर्खास्तगी की मांग तक कर दी थी।


सुरेखा ने बेटी के बयान की जिम्मेदारी लेने से किया इनकार

कोंडा सुरेखा ने पार्टी को दिए जवाब में कहा कि उनकी बेटी एक वयस्क है और उसके निजी राजनीतिक विचारों के लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि बेटी की टिप्पणियों के लिए उनसे स्पष्टीकरण मांगना उचित नहीं है।

लेकिन कांग्रेस की अनुशासन समिति ने मामले को गंभीरता से लिया और सुरेखा को कैबिनेट से हटाने की सिफारिश की थी।


CM ने लिया बड़ा फैसला

अब मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने सुरेखा को मंत्रिमंडल से हटाने का फैसला कर लिया है। उनके निष्कासन की सिफारिश राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा को भेजी गई है। यह कदम तेलंगाना कांग्रेस में कई हफ्तों से चल रहे अंदरूनी विवाद के बाद आया है।


सुरेखा बोलीं- मैंने क्या गलत किया?

कैबिनेट से हटाए जाने के बाद कोंडा सुरेखा ने फैसले पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि उन्होंने कोई भ्रष्टाचार नहीं किया और उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त मौका भी नहीं दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि बेटी के बयान के लिए उन्हें जिम्मेदार क्यों ठहराया जा रहा है।


कांग्रेस के अंदर बढ़ा तनाव

इस पूरे घटनाक्रम ने तेलंगाना कांग्रेस के भीतर चल रही गुटबाजी और मतभेदों को एक बार फिर सामने ला दिया है। सुरेखा की बर्खास्तगी के साथ ही पार्टी नेतृत्व ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि मुख्यमंत्री और पार्टी नेतृत्व के खिलाफ सार्वजनिक बयानबाजी को अनुशासनहीनता के तौर पर देखा जाएगा।

एक बेटी का बयान, पार्टी में बढ़ता विवाद और आखिरकार मंत्री पद से छुट्टी—कोंडा सुरेखा का मामला तेलंगाना कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में बड़ा घटनाक्रम बन गया है।