सिंगापुर में नेपाल की भीषण बाढ़ और एयर इंडिया में सिंगापुर एयरलाइंस के निवेश को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही बहस ने एक चिंताजनक मोड़ ले लिया है। इन दोनों मुद्दों के बीच भारतीय समुदाय को निशाना बनाते हुए कई नस्लभेदी और आपत्तिजनक टिप्पणियां सामने आई हैं। सिंगापुर के गृह मंत्री और वरिष्ठ मंत्री के. षणमुगम ने इन टिप्पणियों को “शर्मनाक, घटिया और पूरी तरह अस्वीकार्य” बताया है। सरकार ने पुलिस से मामले की जांच करने को कहा है।
नेपाल बाढ़ के बाद क्यों बढ़ा विवाद?
26 अगस्त को नेपाल में आई भीषण बाढ़ और फ्लैश फ्लड से बड़े पैमाने पर तबाही हुई। इस आपदा में कई लोगों की मौत हुई और बड़ी संख्या में लोग लापता हुए। इनमें नौ सिंगापुर नागरिक भी शामिल बताए गए। सिंगापुर ने राहत एवं बचाव प्रयासों में सहायता के लिए अपनी टीम भी नेपाल भेजी।
इसी दौरान सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने लापता सिंगापुर नागरिकों को लेकर बेहद आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। इन टिप्पणियों में भारतीयों के खिलाफ नस्लीय पहचान और अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। सरकार ने स्पष्ट किया कि ऐसी भाषा को सामान्य ऑनलाइन बहस मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
एयर इंडिया का निवेश भी बना निशाना
विवाद का दूसरा केंद्र सिंगापुर एयरलाइंस (SIA) और एयर इंडिया के बीच कारोबारी संबंध हैं। एयर इंडिया द्वारा अपने शेयरधारकों से नई पूंजी जुटाने की खबरों के बाद सिंगापुर में निवेश को लेकर सवाल उठे। लेकिन कुछ ऑनलाइन चर्चाओं में आर्थिक और कारोबारी बहस नस्लीय टिप्पणियों में बदल गई।
सिंगापुर के गृह मंत्री के. षणमुगम ने बताया कि एयर इंडिया और SIA के संबंधों पर चर्चा के दौरान भारतीयों के खिलाफ 'स्नेक्स', 'करी', 'प्राटा' और 'ब्लैक मैजिक' जैसे नस्लीय स्टीरियोटाइप वाले शब्दों का इस्तेमाल किया गया। यहां तक कि टेमासेक के वरिष्ठ अधिकारियों और CEO की भारतीय मूल की पहचान को भी निशाना बनाया गया।
सिंगापुर सरकार ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग ने कहा कि सिंगापुर में किसी भी समुदाय के खिलाफ पूर्वाग्रह को सामान्य नहीं बनने दिया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि कारोबारी या राजनीतिक मुद्दों पर बहस करना अलग बात है, लेकिन किसी समुदाय के खिलाफ नस्लीय नफरत फैलाना स्वीकार्य नहीं है।
सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से उन टिप्पणियों को हटाने को कहा है जो स्थानीय दिशानिर्देशों का उल्लंघन करती हैं। पुलिस भी यह जांच कर रही है कि क्या कुछ टिप्पणियों में कानूनी अपराध बनता है।
क्या यह सिंगापुर के समाज की तस्वीर है?
सिंगापुर सरकार ने इस बात पर जोर दिया है कि ऑनलाइन सक्रिय एक छोटा समूह पूरे सिंगापुर समाज का प्रतिनिधित्व नहीं करता। षणमुगम ने कहा कि नस्लीय नफरत को सामान्य होने से रोकना जरूरी है, क्योंकि ऐसी भाषा धीरे-धीरे सार्वजनिक और राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन सकती है।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सिंगापुर खुद को बहुजातीय और बहुधार्मिक समाज के रूप में देखता है। सरकार का कहना है कि नस्लीय विभाजन को बढ़ावा देने वाली ऑनलाइन गतिविधियां सामाजिक सौहार्द के लिए खतरा बन सकती हैं।
भारत-सिंगापुर संबंधों पर असर?
फिलहाल इन ऑनलाइन टिप्पणियों को भारत और सिंगापुर के आधिकारिक संबंधों का प्रतिनिधि नहीं माना जा सकता। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, विमानन और रणनीतिक सहयोग के व्यापक संबंध हैं। सिंगापुर सरकार ने भी स्पष्ट किया है कि एयर इंडिया में निवेश को लेकर किसी भी कारोबारी फैसले का मूल्यांकन व्यावसायिक आधार पर होना चाहिए, न कि किसी व्यक्ति की जातीय पहचान के आधार पर।
ऐसे में नेपाल बाढ़ और एयर इंडिया निवेश से जुड़ी यह घटना एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा करती है—क्या सोशल मीडिया पर छिपी नस्लीय सोच अब सार्वजनिक बहस को प्रभावित करने लगी है? सिंगापुर सरकार का ताजा रुख साफ है कि नस्लीय नफरत को सामान्य ऑनलाइन टिप्पणी मानकर छोड़ना स्वीकार नहीं किया जाएगा।