बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। जन सुराज अभियान के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) को उस समय बड़ा झटका लगा, जब फिल्म डायरेक्टर चेतना झांब ने पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सदस्यता ग्रहण कर ली।
बीजेपी में शामिल होने के बाद चेतना झांब ने कहा कि उन्होंने पार्टी की नीतियों और विकास के एजेंडे से प्रभावित होकर यह फैसला लिया है। वहीं, जन सुराज की ओर से इस घटनाक्रम पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
इसी बीच राजधानी पटना में प्रशांत किशोर को निशाना बनाते हुए कई पोस्टर लगाए गए। इन पोस्टरों पर लिखा था, "जमानत जब्त होना बाकी है", जिसे लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। पोस्टरों के जरिए प्रशांत किशोर की राजनीतिक संभावनाओं पर तंज कसने की कोशिश की गई है।
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि ये पोस्टर किस संगठन या व्यक्ति द्वारा लगाए गए हैं। इस मुद्दे पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं।
बिहार में आगामी चुनावों को देखते हुए राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी और दल-बदल की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में चेतना झांब का बीजेपी में शामिल होना और प्रशांत किशोर को लेकर लगे पोस्टर राज्य की राजनीति में नई बहस का विषय बन गए हैं।