सऊदी अरब के मक्का शहर में पहली बार संभावित हवाई खतरे को लेकर इमरजेंसी अलर्ट जारी किए जाने से पूरे क्षेत्र में चिंता बढ़ गई। 15 सितंबर को सऊदी सिविल डिफेंस ने मक्का, जेद्दा और ताइफ में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने और आधिकारिक सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की सलाह दी। मक्का के लिए जारी अलर्ट कुछ समय बाद हटा लिया गया।


मक्का में क्यों जारी हुआ इमरजेंसी अलर्ट?

अलर्ट के समय सऊदी अधिकारियों ने खतरे का सटीक कारण सार्वजनिक नहीं किया था। लोगों को घर के अंदर रहने, खिड़कियों, बालकनी और छतों से दूर रहने तथा खुले इलाकों से बचने की सलाह दी गई। वाहनों में मौजूद लोगों को पुलों और ऊंची इमारतों से दूर सुरक्षित स्थान पर रुकने को कहा गया।

यह चेतावनी ऐसे समय आई जब हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी शहरों और सैन्य तथा ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले बढ़े हुए हैं।


मक्का के दक्षिण में ड्रोन मार गिराने का सऊदी दावा

16 सितंबर को सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने कहा कि सऊदी एयर डिफेंस ने 15 सितंबर की शाम करीब 6:50 बजे मक्का के दक्षिण में एक ड्रोन को मार गिराया। उनके मुताबिक ड्रोन पवित्र शहर के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले ही नष्ट कर दिया गया।

अल-मलिकी ने इसे मक्का को निशाना बनाने की दूसरी कथित कोशिश बताया और कहा कि इससे पहले जुलाई 2017 में भी एक बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च की गई थी।


2017 में भी मक्का की ओर आई थी मिसाइल

सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के मुताबिक, 27 जुलाई 2017 को हूतियों की ओर से मक्का की दिशा में बैलिस्टिक मिसाइल दागी गई थी। सऊदी अधिकारियों ने उस समय भी मिसाइल को इंटरसेप्ट करने की बात कही थी।

हालांकि, 2026 की घटना को लेकर एक महत्वपूर्ण अंतर है—इस बार सऊदी अधिकारियों ने मक्का के लिए संभावित हवाई खतरे का इमरजेंसी अलर्ट भी जारी किया, जिसे रिपोर्टों में इस युद्ध के दौरान मक्का के लिए पहला ऐसा अलर्ट बताया गया है।


हूतियों ने आरोप से किया इनकार

सऊदी अरब के दावे पर हूती पक्ष ने मक्का को निशाना बनाने से इनकार किया है। हूती अधिकारी हाज़ेम अल-असद ने सऊदी दावे को खारिज करते हुए कहा कि उनका संगठन मक्का या अन्य इस्लामी पवित्र स्थलों को निशाना नहीं बनाता।

इसलिए ड्रोन को हूती हमला बताने का दावा फिलहाल सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन का आधिकारिक दावा है, जबकि हूती पक्ष इसे नकार रहा है।


सऊदी अरब में पहले से बढ़ा हुआ है तनाव

मक्का अलर्ट से एक दिन पहले सऊदी अरब के खमीस मुशैत, आभा और ताइफ में हूती हमलों के बाद 13 नागरिकों के घायल होने की रिपोर्ट आई थी। इसके बाद जेद्दा, जाजान, आभा, अलउला, ताइफ और यानबू समेत कई इलाकों में संभावित खतरे के अलर्ट जारी किए गए थे। बाद में सऊदी सिविल डिफेंस ने इन क्षेत्रों के लिए खतरा टलने की जानकारी दी।


मक्का क्यों है इतना संवेदनशील?

मक्का इस्लाम का सबसे पवित्र शहर है और यहां काबा और मस्जिद अल-हरम स्थित हैं। हर साल दुनिया भर से लाखों लोग हज और उमरा के लिए यहां पहुंचते हैं। ऐसे में मक्का के आसपास किसी भी सैन्य खतरे को सऊदी अरब बेहद गंभीर सुरक्षा मुद्दे के रूप में देखता है।

सऊदी गठबंधन के प्रवक्ता ने कहा है कि दोनों पवित्र मस्जिदों और जायरीनों की सुरक्षा “रेड लाइन” है।


क्या मक्का पर मिसाइल गिरी?

नहीं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार मक्का शहर पर मिसाइल गिरने की पुष्टि नहीं हुई है। 15 सितंबर को इमरजेंसी अलर्ट जारी हुआ था और अगले दिन सऊदी अधिकारियों ने मक्का के दक्षिण में एक ड्रोन को इंटरसेप्ट करने का दावा किया। हूती पक्ष ने मक्का को निशाना बनाने से इनकार किया है।

यानी फिलहाल सबसे सटीक तस्वीर यह है: मक्का में पहली बार संभावित हवाई खतरे का इमरजेंसी अलर्ट जारी हुआ, और सऊदी अधिकारियों ने बाद में मक्का के दक्षिण में एक कथित हूती ड्रोन को मार गिराने का दावा किया—लेकिन हूती इस दावे से इनकार कर रहे हैं।