राजस्थान के जोधपुर नगर निगम चुनाव का नतीजा बेहद करीबी मुकाबले के बाद एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया। 100 वार्डों वाले नगर निगम में शुरुआती तौर पर बीजेपी और कांग्रेस दोनों 44-44 सीटों पर थीं। वार्ड 50 का परिणाम EVM में तकनीकी खराबी के कारण रोक दिया गया था।
इसके बाद वार्ड 50 में दोबारा मतदान कराया गया। इस चुनाव में बीजेपी के हेमाराम ने 83 वोटों से जीत दर्ज की, जिससे बीजेपी की कुल सीटें 45 हो गईं।
44-44 की बराबरी से शुरू हुआ था सत्ता का खेल
जोधपुर नगर निगम के 100 वार्डों में मतगणना के दौरान बीजेपी और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। दोनों दलों ने 44-44 वार्डों में जीत दर्ज की थी।
वहीं बाकी सीटों पर निर्दलीय और अन्य उम्मीदवार विजयी हुए। इस स्थिति में एक सीट का परिणाम भी नगर निगम में आगे की राजनीतिक तस्वीर के लिए महत्वपूर्ण हो गया था।
वार्ड 50 में क्यों रुकी थी गिनती?
वार्ड 50 के एक बूथ पर EVM में तकनीकी खराबी के कारण मतदान से जुड़े आंकड़ों की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी थी। इसलिए इस वार्ड का परिणाम रोक दिया गया और बाद में दोबारा मतदान कराने का निर्णय लिया गया।
इसी वार्ड पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच बराबरी टूटने का गणित टिका हुआ था।
हेमाराम की जीत से बीजेपी 45 पर पहुंची
दोबारा मतदान में बीजेपी उम्मीदवार हेमाराम ने 83 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। इस जीत के साथ बीजेपी की संख्या 44 से बढ़कर 45 वार्ड हो गई।
यानी जिस चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस बराबरी पर खड़ी थीं, उसमें वार्ड 50 के नतीजे ने बीजेपी को एक सीट की बढ़त दिला दी।
लेकिन बहुमत का आंकड़ा अभी दूर
100 सदस्यीय नगर निगम में केवल 45 सीटों के साथ बीजेपी को अपने दम पर स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, बोर्ड के गठन के लिए बहुमत का आंकड़ा 51 है। इसलिए आगे निर्दलीय और अन्य पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
चुनाव परिणाम के बाद दोनों प्रमुख दलों के बीच निर्दलीय पार्षदों के समर्थन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की खबरें भी सामने आई हैं।
अब आगे क्या होगा?
हेमाराम की जीत ने चुनावी गणित जरूर बदल दिया है, लेकिन नगर निगम में बोर्ड का गठन केवल सीटों की संख्या पर निर्भर नहीं करेगा। 45 सीटों वाली बीजेपी को बहुमत के लिए अन्य पार्षदों के समर्थन की जरूरत होगी।
दूसरी तरफ कांग्रेस के पास 44 सीटें हैं, इसलिए उसके लिए भी निर्दलीय और अन्य विजयी पार्षदों का समर्थन महत्वपूर्ण हो सकता है।
यानी जोधपुर में 44-44 की बराबरी से शुरू हुआ सियासी मुकाबला अब बीजेपी की 45 सीटों तक पहुंच चुका है, लेकिन नगर निगम की अंतिम सत्ता का समीकरण अभी भी समर्थन जुटाने पर निर्भर करेगा।