कौन हैं एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा?
जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना के अनुभवी फाइटर पायलट और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट रहे हैं। उन्हें 6 दिसंबर 1986 को फाइटर स्ट्रीम में कमीशन किया गया था। अपने लंबे सैन्य करियर में उन्होंने 3,000 घंटे से ज्यादा उड़ान भरी और 18 से अधिक तरह के फाइटर, ट्रांसपोर्ट विमान और हेलिकॉप्टर उड़ाए।
कारगिल युद्ध में भी निभाई अहम भूमिका
मिश्रा के करियर का एक महत्वपूर्ण अध्याय कारगिल युद्ध से जुड़ा है। वह उस टीम का हिस्सा थे जिसने Mirage-2000 विमानों में लेजर-गाइडेड बमों को ऑपरेशनल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इन हथियारों का इस्तेमाल टाइगर हिल और मुंथो ढालो जैसी महत्वपूर्ण कार्रवाइयों में किया गया था।
बेस्ट टेस्ट पायलट के तौर पर पहचान
जितेंद्र मिश्रा सिर्फ ऑपरेशनल फाइटर पायलट ही नहीं, बल्कि एक अनुभवी टेस्ट पायलट भी रहे हैं। उन्होंने HAL नासिक और Aircraft and Systems Testing Establishment में चीफ टेस्ट पायलट की जिम्मेदारी संभाली। उनके अनुभव में विमान परीक्षण, ऑपरेशनल प्लानिंग और एयर फोर्स ट्रेनिंग से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां शामिल रही हैं।
ऑपरेशन सिंदूर में भी संभाली कमान
1 जनवरी 2025 को जितेंद्र मिश्रा ने भारतीय वायुसेना की Western Air Command की कमान संभाली थी। इसी कमान के प्रमुख रहते उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई। उनके सैन्य करियर में इस भूमिका को बेहद अहम माना जाता है।
ऑपरेशन सिंदूर में उनकी भूमिका के लिए उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल (SYSM) से भी सम्मानित किया गया था।
अब राम मंदिर ट्रस्ट की बड़ी जिम्मेदारी
सेना से रिटायर होने के बाद अब उन्हें श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पहला CEO बनाया गया है। ट्रस्ट ने 2 सितंबर 2026 को उनकी नियुक्ति की घोषणा की। उनका काम मंदिर और ट्रस्ट से जुड़े प्रशासनिक, वित्तीय तथा संचालन संबंधी मामलों को अधिक व्यवस्थित तरीके से संभालना होगा।
उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब राम मंदिर ट्रस्ट अपने प्रशासन और प्रबंधन को और मजबूत करने की दिशा में बदलाव कर रहा है।
सैन्य अनुशासन से मंदिर प्रशासन तक
जितेंद्र मिश्रा के पास ऑपरेशनल प्लानिंग, नेतृत्व, लॉजिस्टिक्स और बड़े संस्थानों के प्रबंधन का लंबा अनुभव है। यही वजह है कि सैन्य सेवा के बाद उन्हें राम मंदिर जैसे बड़े धार्मिक और राष्ट्रीय महत्व के प्रोजेक्ट की प्रशासनिक जिम्मेदारी दी गई है।
यानी फाइटर पायलट से टेस्ट पायलट, कारगिल से ऑपरेशन सिंदूर और अब अयोध्या के राम मंदिर के पहले CEO तक—जितेंद्र मिश्रा का करियर बेहद खास रहा है।