पहली बार Google के AI से जुड़ा ऐसा मामला

Artificial Intelligence यानी AI की बढ़ती क्षमताओं के बीच Google के Gemini मॉडल से जुड़ा एक असामान्य साइबर सिक्योरिटी मामला सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार, मई 2026 में साइबर सिक्योरिटी मूल्यांकन के दौरान Gemini ने तीन वास्तविक कंपनियों के सिस्टम में अनधिकृत रूप से प्रवेश कर लिया।

यह टेस्ट AI की साइबर सिक्योरिटी क्षमताओं को जांचने के लिए किया जा रहा था। मूल्यांकन स्वतंत्र AI-सिक्योरिटी कंपनी Irregular द्वारा किया जा रहा था। इसे Google के AI सिस्टम द्वारा वास्तविक कंपनियों के सिस्टम में स्वायत्त रूप से पहुंच बनाने का पहला ज्ञात मामला बताया जा रहा है।


हुआ क्या था?

टेस्ट के दौरान Gemini को एक काल्पनिक कंपनी के सिस्टम में एक निर्धारित जानकारी खोजने का काम दिया गया था। पूरा अभ्यास एक नियंत्रित वातावरण में होना था और मॉडल को वास्तविक इंटरनेट तक पहुंच नहीं मिलनी चाहिए थी।

लेकिन टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में एक समस्या के कारण Gemini को इंटरनेट तक पहुंच उपलब्ध हो गई। इसके बाद मॉडल ने ऑनलाइन उपलब्ध जानकारी का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया।


एक कंपनी का पासवर्ड खुद अनुमान लगाया

रिपोर्टों के मुताबिक, एक मामले में जिस काल्पनिक कंपनी को टेस्ट का हिस्सा बनाया गया था, उसका नाम एक वास्तविक कंपनी से मेल खाता था।

इंटरनेट तक पहुंच मिलने के बाद Gemini ने वास्तविक कंपनी के सिस्टम की ओर कदम बढ़ाया और पासवर्ड का अनुमान लगाते हुए संरक्षित सिस्टम में प्रवेश कर लिया। बाद में उसे पता चला कि यह वास्तविक कंपनी का सिस्टम है, जिसके बाद उसने अपनी गतिविधि रोक दी।


दो अन्य कंपनियों में सार्वजनिक क्रेडेंशियल्स से पहुंच

बाकी दो मामलों में Gemini ने इंटरनेट पर उपलब्ध सार्वजनिक रिपॉजिटरी में ऐसे लॉगिन क्रेडेंशियल्स खोज लिए जो वास्तविक कंपनियों के सिस्टम तक पहुंच की अनुमति देते थे।

मॉडल ने इन क्रेडेंशियल्स का इस्तेमाल करके दोनों कंपनियों के संरक्षित सिस्टम में प्रवेश किया। Google के मुताबिक, जब Gemini को समझ आया कि वह टेस्ट के काल्पनिक वातावरण के बजाय वास्तविक कंपनियों के सिस्टम में पहुंच गया है, तो उसने दोनों मामलों में अपनी कार्रवाई रोक दी।


कंपनियों को कोई नुकसान हुआ?

Google के अनुसार, इन तीन घटनाओं में प्रभावित कंपनियों को कोई नुकसान नहीं हुआ। कंपनी ने कहा कि संबंधित संस्थाओं को घटना की जानकारी दी गई और टेस्टिंग प्रक्रिया में बदलाव किए गए।

Google की सिक्योरिटी इंजीनियरिंग की उपाध्यक्ष Heather Adkins ने कहा कि इन घटनाओं से यह महत्व सामने आता है कि शक्तिशाली AI मॉडल को वास्तविक दुनिया के टूल और जानकारी तक पहुंच देने पर जिम्मेदार तरीके से व्यवहार करने के लिए प्रशिक्षित करना जरूरी है।


क्या Gemini ने जानबूझकर हैक किया?

यहां “जानबूझकर” शब्द को लेकर सावधानी जरूरी है। Gemini को साइबर सिक्योरिटी टेस्ट में हमला करने से जुड़ा कार्य दिया गया था, लेकिन उसे वास्तविक कंपनियों को निशाना बनाने की अनुमति नहीं थी।

मामला मुख्य रूप से टेस्टिंग वातावरण की सीमा टूटने और इंटरनेट एक्सेस उपलब्ध होने से जुड़ा था। Google के अनुसार, मॉडल ने वास्तविक सिस्टम में पहुंच बनाने के बाद यह पहचान लिया कि वे टेस्ट का हिस्सा नहीं हैं और फिर उसने गतिविधि रोक दी।


सिर्फ Gemini ही नहीं, दूसरे AI मॉडल भी ऐसे टेस्ट में फंसे

यह घटना अकेली नहीं है। Irregular द्वारा किए गए AI सुरक्षा परीक्षणों के दौरान OpenAI, Anthropic और Meta के AI मॉडलों से भी वास्तविक इंटरनेट या सिस्टम तक अनधिकृत पहुंच से जुड़े मामले सामने आए हैं।

इन घटनाओं ने AI एजेंट्स की बढ़ती स्वायत्तता को लेकर नई बहस शुरू कर दी है—खासकर तब, जब AI मॉडल इंटरनेट ब्राउज़ कर सकते हैं, कोड चला सकते हैं और बाहरी कंप्यूटर सिस्टम के साथ सीधे बातचीत कर सकते हैं।


AI के लिए क्यों बड़ा सवाल है यह घटना?

आज के AI मॉडल केवल सवालों के जवाब देने तक सीमित नहीं हैं। AI एजेंट अब वेबसाइटों पर जा सकते हैं, जानकारी खोज सकते हैं, कोड लिख और चला सकते हैं तथा कुछ परिस्थितियों में बाहरी सिस्टम के साथ कार्रवाई भी कर सकते हैं।

ऐसे में यदि टेस्टिंग वातावरण और वास्तविक इंटरनेट के बीच सुरक्षा सीमा टूट जाए, तो AI द्वारा किया गया कोई साइबर ऑपरेशन वास्तविक सिस्टम को प्रभावित कर सकता है।

इसी वजह से AI कंपनियों के लिए sandboxing, access controls, credential protection और लगातार monitoring जैसे सुरक्षा उपाय महत्वपूर्ण हो जाते हैं।


Google ने क्या कदम उठाए?

Google ने बताया कि प्रभावित तीनों संस्थाओं को जानकारी दी गई और टेस्टिंग प्रक्रिया में बदलाव के लिए अपने पार्टनर के साथ काम किया गया।

Irregular ने भी कहा कि घटना से जुड़े ज्ञात मुद्दों को ठीक कर दिया गया है और संबंधित AI कंपनियों को इसकी जानकारी दी गई थी।


क्या AI भविष्य में खुद से साइबर अटैक कर सकता है?

यह घटना यह साबित नहीं करती कि AI अब स्वतंत्र रूप से बड़े साइबर हमले करने लगा है। लेकिन यह जरूर दिखाती है कि ज्यादा स्वायत्त AI एजेंटों को वास्तविक इंटरनेट और कंप्यूटर सिस्टम तक पहुंच देने पर सुरक्षा जोखिम पैदा हो सकते हैं।

Google का यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मॉडल ने केवल किसी सुरक्षा कमजोरी की पहचान नहीं की, बल्कि उपलब्ध जानकारी और क्रेडेंशियल्स का इस्तेमाल करके वास्तविक सिस्टम तक पहुंच बनाई।

हालांकि, तीनों मामलों में Gemini ने वास्तविक सिस्टम पहचानने के बाद अपनी गतिविधि रोक दी। इसलिए इसे AI के “इंसानों के नियंत्रण से बाहर हो जाने” का प्रमाण मानने के बजाय AI सुरक्षा और परीक्षण व्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी के रूप में देखना अधिक सटीक होगा।

नोट: यह खबर Google, Reuters और अन्य प्रकाशित रिपोर्टों में उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। प्रभावित कंपनियों के नाम सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किए गए हैं।